महाकुंभ में आज बनेगा पहला विश्व रिकॉर्ड, 50 करोड़ श्रद्धालुओं का संख्या होगी पार

गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का तट विश्व के सबसे बड़े मानव समागम का साक्षी बन चुका है।
त्रिवेणी में अब तक 50 करोड़ से अधिक श्रद्धालु डुबकी लगा चुके हैं। श्रद्धालुओं का आगमन लगातार जारी है। तीर्थराज प्रयागराज की पवित्र धरती पर 13 जनवरी से आयोजित हो रहा दिव्य और भव्य धार्मिक-सांस्कृतिक महाकुंभ अब इतिहास में दर्ज हो चुका है। अब तक 50 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी संगम में सनातन आस्था की पवित्र डुबकी लगाकर धार्मिक और सांस्कृतिक एकता की अद्वितीय मिसाल प्रस्तुत की है।

50 करोड़ से अधिक की यह संख्या मानव इतिहास की सबसे बड़ी सहभागिता बन चुकी है।

यह विशाल समागम इस तथ्य से स्पष्ट है कि दुनिया में केवल भारत और चीन की जनसंख्या ही यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या से अधिक है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार के सुव्यवस्थित प्रयासों से भारत की इस प्राचीन परंपरा ने अपनी दिव्यता और भव्यता से पूरी दुनिया को आकर्षित किया है।

यूएस सेंसस ब्यूरो की एक रिपोर्ट के अनुसार…

पूरी दुनिया के 200 से अधिक देशों में जनसंख्या के दृष्टिकोण से टॉप 10 देशों में क्रमश: भारत (1,41,93,16,933), चीन (1,40,71,81,209), अमेरिका (34,20,34,432), इंडोनेशिया (28,35,87,097), पाकिस्तान (25,70,47,044), नाइजीरिया (24,27,94,751), ब्राजील (22,13,59,387), बांग्लादेश (17,01,83,916), रूस (14,01,34,279) और मैक्सिको (13,17,41,347) शामिल हैं। वहीं महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं की अब तक की संख्या (50 करोड़ पार) को देखा जाए तो केवल भारत और चीन की जनसंख्या ही यहां आने वाले श्रद्धालुओं से अधिक है। जबकि अमेरिका, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, नाइजीरिया, ब्राजील, बांग्लादेश, रूस और मैक्सिको की जनसंख्या भी इससे कहीं पीछे है। यह दर्शाता है कि महाकुंभ अब केवल एक पर्व नहीं, बल्कि यह सनातन धर्म के विशाल रूप का प्रतीक बन चुका है।

45 करोड़ का था सरकारी अनुमान

मां गंगा, मां यमुना और अदृश्य मां सरस्वती के पवित्र संगम में श्रद्धा और आस्था से भरे साधु-संतों, श्रद्धालुओं, कल्पवासियों, स्नानार्थियों और गृहस्थों का स्नान अब उस शिखर को भी पार कर चुका है, जिसकी महाकुंभ से पहले ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उम्मीद जताई थी। सीएम योगी ने पहले ही अनुमान लगाया था कि इस बार का महाकुंभ स्नानार्थियों की संख्या का नया रिकॉर्ड स्थापित करेगा। उन्होंने शुरुआत में ही 45 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना जताई थी। उनका यह अनुमान 11 फरवरी को ही सच साबित हो गया था। वहीं शुक्रवार (14 फरवरी) को यह संख्या 50 करोड़ को पार कर चुकी है। अभी महाकुंभ में 12 दिन और एक महत्वपूर्ण स्नान पर्व शेष है। उम्मीद जताई जा रही है कि श्रद्धालुओं की संख्या 55 से 60 करोड़ के बीच पहुंच सकती है।

विभिन्न स्नान पर्वों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़

यदि अब तक के कुल स्नानार्थियों की संख्या का विश्लेषण करें तो सबसे अधिक 8 करोड़ श्रद्धालुओं ने मौनी अमावस्या पर स्नान किया था, जबकि 3.5 करोड़ श्रद्धालुओं ने मकर संक्रांति के अवसर पर अमृत स्नान किया था। एक फरवरी और 30 जनवरी को 2-2 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने पुण्य डुबकी लगाई, जबकि पौष पूर्णिमा पर 1.7 करोड़ श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी में आस्था की डुबकी लगाई थी। इसके अतिरिक्त बसंत पंचमी पर 2.57 करोड़ श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी में पवित्र स्नान किया था। वहीं माघी पूर्णिमा के महत्वपूर्ण स्नान पर्व पर भी दो करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई।

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